क्या सच में इंश्योरेंस कंपनी क्लेम देने में नखरे करती हैं ? 5 कड़वे सच

जब हम insurance policy लेते हैं,तू हमें लगता है,इमरजेंसी में insurance companyहमारा साथ देगी,लेकिन जैसे ही समय आता है, इंश्योरेंस कंपनी नखरे करने लगती है, या क्लेम रिजेक्ट कर देती हैं, 

आज मैं आपको बताने वाला हूं, इंश्योरेंस कंपनी क्लेम रिजेक्ट क्यों करती है।

सच थोड़ा कड़वा है - 



आईए जानते हैं 5 कड़वे सच जो हर पॉलिसी होल्डर को जानना चाहिए।

1.अधूरी जनकारी- क्लेम रिजेक्शन की सबसे बड़ी वजह है।

जब हम हेल्थ इंश्योरेंस या लाइफ इंश्योरेंस लेते हैं, उसे समय हम छोटी-छोटी मेडिकल हिस्ट्री छुपा लेते हैं, जैसे कि डायबिटीज, BP या फिर कोई पुरानी बीमारी। और जब claim का समय आता है तो, कंपनी मेडिकल रिकॉर्ड चेक करती है, और अगर रिकॉर्ड मैच नहीं करते तो क्लेम रिजेक्ट हो जाता है।

सच्चाई यह हैकि कंपनी नखरे नहीं कर ती, वह बस कॉन्ट्रैक्ट के हिसाब से काम कर रही हैं।

2.Insurance policy की शर्त

अक्सर हम पॉलिसी की शर्तों को ठीक से नहीं पढ़ते हैं, पॉलिसी लेते समय Fine print जरूर पढ़ें, नहीं तो ये आप की सबसे बड़ी गलती बन सकती हैं,

Health insurance policy यहां जरूर चेक करें जैसे -

  1. 2-4 साल का waiting period 
  2. pre existing disease claim 
  3. रूम रेंट लिमिट क्या है, है भी या नहीं


अगर आप insurence policy लेते समय इन बातों का ध्यान रखते हैं तो क्लेम रिजेक्ट होने की बहुत ही कम चांस होंगे।

3.हर क्लेम फुल अमाउंट में नही मिलता 

हां सही समझे, मालूम आपका हॉस्पिटल का बिल 2 लाख का है, लेकिन पॉलिसी में कुछ लिमिट्स है जैसे - 

  1. ICU limit 
  2. रूम रेंट लमिट
  3. Co payment clause 
अगर यह सब लागू है तो, इंश्योरेन्स कम्पनी उतना ही कवर देगी जितना कॉन्टैक्ट में है।


4.फ्रॉड क्लेम ने सिस्टम को सख्त बना दिया है -

भारत में insurance fraud  के मामले हर दिन बढ़ते 0जा रहे हैं, जैसे फर्जी बिल, नकली अस्पताल और  बढ़ते हुए खर्च ने, सिस्टम को सख्त बना दिया है।

इसी कारण इंश्योरेंस क्लेम के समय आपसे अतिरिक्त डॉक्यूमेंट मांगे जाते हैं, जांच होती हैं,‌अधिक समय लगता है।

सच यहां है कि कुछ लोगों की गलती का असर सभी पर पड़ता है।


5.सही एजेंट या सही सलह की कमी - 

बहुत सारे लोग सिर्फ कम प्रीमियम देखकर पॉलिसी लेते हैं, जो बाद में बहुत बड़ी गलती साबित होती हैं,
 कम प्रीमियम के चक्कर में - 
  1. कम कवर ले लेते हैं 
  2. गलत प्लान चुन लेते हैं 
Insurencc क्लेम के टाइम पर परेशानी होती है ऐसे में एजेंट से सही सलाह जरूरी है, नहीं तो आप का सस्ता प्लान आप को महंगा पड़ा सकता है।

तो क्या सारी गलती इंश्योरेंस कंपनी की है।

 सच यह है कि insurence compney 1 कांट्रैक्ट है,जो एक प्रीमियम के बदले हमें ट्रीटमेंट देत है,insurenc compeny कोई bhagwan nahi hai, यह नियम और शर्तों पर चलती है। 

Insurance policy लेते समय इन बातों का ध्यान रखें 

  • अपनी पूरी जानकारी ईमानदारी से दें। 
  • पॉलिसी की शर्त को ध्यान से पढ़ें
  • सही प्लान को चुने
  • डॉक्यूमेंट को ध्यान से भरें
  • हर डॉक्यूमेंट को संभाल कर रखें


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